उच्च रक्तचाप व मधुमेह से लेकर हृदय रोगों की रामबाण औषधि है अर्जुन की छाल का काढ़ा 

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जानिए हृदय रोगों का कैसे नाश करता है अर्जुन की छाल का काढ़ा ? Ayurvedic Treatment for Heart Diseases

अगर आपको भी है दिल से संबधित कोई बीमारी तो ज़रूर पियें अर्जुन की छाल का काढ़ा | यह रहा सबसे बेस्ट Ayurvedic Treatment for Heart Diseases

Ayurvedic Treatment for Heart Diseases :

अर्जुन की पेड़ के औषधीय गुणों के बारे में अगर हम बात करें तो यह बहुत से रोगों का समूल विनाश करने के लिए आयुर्वेद में प्राचीन समय से हमारे आयुर्वेदाचार्यों द्वारा इस्तेमाल में लाया जाता रहा है | खासतौर पर इसकी छाल को हृदय रोगों के उपचार के लिए वरदान माना गया है | जिन लोगों को दिल से सम्बन्धित किसी प्रकार की कोई भी दिक्कत है उन्हें इसका सेवन करने की सलाह दी जाती है |

अर्जुन के पेड़ की छाल में और हार्ट की बिमारियों में ऐसा क्या सम्बन्ध है? आइये जानते हैं किस प्रकार इसकी छाल के काढ़े को पीने का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है जिससे दिल की बीमारियाँ दूर हो जाती हैं |

हार्ट अटैक का कारण : वैसे तो डॉक्टर आपको ह्र्द्यघात के कई कारण बताते हैं | लेकिन अगर हम इसे आयुर्वेद की तकनिकी भाषा में समझने का प्रयास करें तो इसका मूल कारण है रक्त की अम्लता का बढ़ जाना | और रक्त में अम्लता बढती है पेट की अम्लता के कारण | जब काफी समय तक पेट में अम्लता (Acidity) बनती रहे तो वो खून में चढ़ना शुरू हो जाती है तथा खून अम्लीय होना शुरू हो जाता है | यही अम्लीय खून हृदयघात का कारण बनता है | अम्लीय रक्त को हृदय पास करने से मना कर देता | हम जानते है कि रक्त को पुरे शरीर में सप्लाई करने का काम ह्रदय का ही है |

अब खून सप्लाई करने में दिन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी | और इसी धड़कने की गति बढ़ जाएगी | इसे ही आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की भाषा में Heart Beat तेज़ होना कहा जाता है | यही समस्या अगर अधिक दिनों तक चलती रहे तो एक दिन यही हार्ट-अटैक का कारण बनती है |

अब तक अगर आपने इसे अच्छे से समझा है तो आपको समझ आ गया होगा कि इस बीमारी की जड़ है ‘अम्लता’ यानि पेट में बनने वाला अम्ल | अब यदि हम आज की साइंस के हिसाब से देखें तो एक सूत्र आप सभी ने 8वीं क्लास में ही पढ़ा होगा | सूत्र है -:

अम्ल+क्षार=न्यूटल (यानि कुछ भी नही)

अब यदि अम्लता को खत्म करना है तो तो उसमे क्षार मिलाना है | इसी लिए आयुर्वेद में पेट की अम्लता को कम करने के लिए क्षारीय चीज़ों के सेवन की सलाह दी जाती है | और अर्जुन की छाल से ज्यादा अम्लीय चीज़ प्रकृति में दूसरी नही है | तो आप अर्जुन के पेड़ की छाल के इस गुण के बारे में जान गये होंगे | अब आपको बताते हैं इसका प्रयोग कैसे किया जाता है ?

वैसे तो कई आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने वाली कंपनियां अर्जुन की छाल से अर्जुनारिष्ट नामक औषधि बनाती हैं | लेकिन सबसे उत्तम है यदि आप पंसारी की दुकान से लाकर अपने घर पर ही अर्जुन की छाल का चूर्ण करके इसका काढ़ा बनाकर पीते हैं |

हृदय रोगों के अलावा अर्जुन की छाल में अन्य रोगों को दूर करने की भी क्षमता होती है | जैसे – मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मुह के छाले आदि |

इसका प्रयोग सिमित मात्रा में ही करना चाहिए |

नोट -यह जानकारी आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने के किये जनहित में लिखी गयी है |  किसी भी प्रकार की बीमारी में इसका प्रयोग करने से पहले चिकित्सीय परमर्श आवश्यक है |