सुब्रमण्यम स्वामी से इतना क्यों चिढ़ता है गाँधी परिवार ? स्वामी के जीवन के ये तथ्य नही जानते होंगे आप |

0
biography of dr. subramanian swamy

कभी अच्छे गणितज्ञ रहे सुब्रमण्यम स्वामी इसलिए राजनीती में आये 

New Hindi News : सुब्रमण्यम स्वामी के जीवन के   बारे में बहुत कम लोग जानते हैं| उनका जन्म 15 सितम्बर 1939 को चेन्नई में हुआ था| स्वामी का जीवन बहुत ही उतार-चढ़ावों वाला रहा है| कहा जाता है कि स्वामी बचपन से ही   अपने पिताजी से बहुत प्रभावित थे| गणित   विषय पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी| वो एक बहुत बड़े गणितज्ञ बनना चाहते थे| स्वामी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज से गणित ओनर्स की डिग्री हासिल की|   फिर मास्टर  के लिए कोलकत्ता चले गये|

Biography of Dr. Subramanian Swamy

उच्च शिक्षा के लिए सुब्रमण्यम स्वामी हॉवर्ड यूनिवर्सिटी चले   गये| वहां से अर्थशास्त्र में पीएचडी की      डिग्री प्राप्त की | उस    समय उनकी उम्र 24 साल थी| और उनकी प्रतिभा का पता इसी बात से चलता है कि 27 साल की उम्र में उन्होंने होवार्ड मे     पढ़ना भी शुरू कर दिया|

स्वामी का विद्रोही गुण कोलकाता में पढाई के दौरान ही सामने आ गया था| भारतीय सांख्यिकी इंस्टीच्यूट, कोलकाता के तत्कालीन डायरेक्टर प्रो.पीसी महालानोबिस   जो कि   स्वामी के पिता के प्रतिद्वंद्वी   थे | इसी कारण उन्होंने स्वामी को ख़राब ग्रेड देना शुरू कर दिया|   इसके बाद स्वामी ने एक पत्र लिखकर बताया कि पीसी महालानोबिस जी का गणना करने का तरीका मौलिक नही बल्कि परम्परावादी है|

biography of dr. subramanian swamy

सन 1968 में अमर्त्य सेन के बुलावे पर सुब्रमण्यम स्वामी दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में    पढ़ाने     के लिए आ गये | यहाँ रहते हुए उन्होंने आइआइटी के सम्मेलनों में कहना शुरू कर दिया कि भारत   की पंचवर्षीय योजनायें सही नही है इन्हें बंद कर देना चाहिए| इनसे विदेशी पूंजी पर निर्भरता बढती है| और जब तक देश में पूंजी निर्माण नही होगा देश का आर्थिक विकास नही  सकता| इंदिरा गाँधी को स्वामी का यह सुर पसंद नही आया|

इंदिरा गाँधी सुब्रमण्यम स्वामी के इन विचारों से इतनी नाराज़ हुई कि 1972 में स्वामी को   नौकरी से निकलवा दिया| जवाब में स्वामी ने    अदालत  का सहारा लिया और 1991 में फैसला स्वामी के पक्ष  आया| लेकिन इसके बाद वो केवल एक बार आइआइटी गये वो भी अपना इस्तीफ़ा सौंपने|

1974 में नाना जी देशमुख ने जनसंघ की और से स्वामी को राज्यसभा भेज दिया|  कुछ समय बाद जब देश में आपातकाल लगा तो 19 महीने के आपातकाल में पुलिस उन्हें पकड़ नही पायी| पुलिस से बचने के लिए वो या तो गुजरात में आकर रहते थे या तमिलनाडु में | इन दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार नही थी| गुजरात में स्वामी तत्कालिन मंत्री मकरंद देसाई के घर पर ठहरते    थे| नरेंद्र मोदी उस समय स्वामी को लाने ले जाने का काम करते थे|

गिरफ़्तारी से बचने के लिए स्वामी कुछ समय के लिए अमेरका भी भाग गये थे| इस दौरान अमेरिका से भारत आकर उन्होंने सिख के भेष में संसद के सत्र में भाग लिया और अपनी बात कही| इसके बाद वो तुरंत गायब हो गये|

1977 में स्वामी जनता पार्टी के स्थापित होने के समय इसके संस्थापक सदस्यों में में से एक थे| और जनता पार्टी में 1990 में वो अध्यक्ष बन गये| परन्तु 2013 में अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया|