चाणक्य नीति : इन तीन लोगों की भलाई करने पर व्यक्ति भयंकर दुखों से घिर जाता है

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New Hindi News : कहा जाता है कि किसी का भला करने पर आपके साथ भी अच्छा ही होता है|लेकिन आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसा नही है, इस प्रकार के लोगों की भलाई कभी न करें| आमतौर पर दुसरे लोगों की भलाई करना नैतिकता के तौर पर अच्छा समझा जाता है|परन्तु राजनीती व कूटनीति के महान पंडित आचार्य चाणक्य के अनुसार हर किसी के लिए ये सत्य नही है| उन्होंने कुछ लोग बताये हैं जिनकी भलाई करके व्यक्ति हमेशा दुखी ही रहता है| चाणक्य ने इस प्रकार के लोगों से हमेशा दूर रहने की सलाह दी है| आइये जानते हैं वो किस प्रकार के लोग हैं जिनका भला करके व्यक्ति घोर दुखों में घिर जाता है|

संस्कृत में मूल श्लोक

मूर्खाशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।
दु:खिते सम्प्रयोगेण पंडितोऽप्यवसीदति।

1. मूर्खाशिष्योपदेशेन यानी मूर्ख शिष्य को उपदेश देना

 चाणक्य के अनुसार मूर्ख स्त्री या पुरुष को ज्ञान या उपदेश नहीं देना चाहिए| हम इन लोगों को ज्ञान देकर इनका भला करते हैं लेकिन मूर्ख व्यक्ति इस प्रकार की बातों को नहीं समझता| वे व्यर्थ की बातें करके समय नष्ट करते हैं| मूर्ख व्यक्ति को ज्ञान देने से मानसिक तनाव झेलना पड़ता है इसलिए इस प्रकार के लोगों से दूरी बनाकर रखें|

2. दुष्ट स्त्री का भरण-पोषण करना 

यदि कोई स्त्री चरित्रहीन है, कर्कशा है, दुष्ट यानी बुरे स्वभाव वाली है तो उसका भरण-पोषण करने वाले पुरुष को कभी भी सुख प्राप्त नहीं होता है| ऐसी स्त्री को सिर्फ धन से मोह होता है| सज्जन पुरुष यदि ऐसी स्त्रियों के संपर्क में रहेंगे तो समाज और घर-परिवार में उन्हें अपयश ही प्राप्त होता है| जो स्त्री धर्म के पथ से भटक जाती है, वह स्वयं तो पाप करती है साथ ही दूसरों को भी पाप का भागी बना लेती है| अत: सज्जन पुरुष को इस प्रकार की स्त्रियों से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं रखना चाहिए|

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3. हमेशा अकारण ही दुखी रहने वाला

चाणक्य के अनुसार जो लोग भगवान के दिए सुखों से संतुष्ट नहीं होते अौर हर घड़ी अपने दुख का ही रोना रोते रहते हैं| ऐसे लोगों के साथ रहने से दुख की ही प्राप्ति होती है| समझदार लोग जो मिला उसी में संतोष करके खुश रहते हैं| बिना कारण दुखी रहने वाले लोग दूसरों से ईर्ष्या करते रहते हैं| वे स्वयं कभी सुखी नहीं रहते। ऐसे लोगों से दूर रहने में ही भलाई है|