महाराष्ट्र के कोपर्डी रेप और हत्याकांड में तीनों दोषियों को फांसी की सज़ा ! तीनो दलित समाज से हैं !

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2016 में मुम्बई के अहमद नगर कोपर्डी में 15 साल की नाबालिग की रेप के बाद हत्या कर दी गयी थी | इस केस में जिला सत्र न्यायालय ने तीनो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई |

New Hindi News : 13 जुलाई 2016 को 9वीं की छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई थी | इस केस ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा करने वाले मराठा आंदोलन की नीव रखी थी |इस केस में तीन लोगों को दोषी पाया गया है |और तीनों ही आरोपियों जितेंद्र बाबूलाल शिंदे, संतोष गोरख भवाळ और नितीन गोपीनाथ भैलुमे को कोर्ट ने फांसी की सज़ा का फैसला सुनाया है | विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के मुताबिक सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ 31 गवाही के अलावा 24 परिस्थितिजन्य सबूत भी अदालत में पेश किए गए थे |

करीब डेढ़ साल पुराना है मामला

13 जुलाई 2016 को 15 साल की एक बच्ची का इन तीनों ने अहमदनगर जिले के कोपर्डी गांव में बलात्कार किया था और फिर उसे मार डाला था। पीड़ित की तरफ से कोर्ट में उज्ज्वल निकम ने कहा था कि यह दुर्लभ मामला है इसलिए तीनों को सजा ए मौत दी ही जानी चाहिए |लड़की मराठा थी इसलिए घटना के बाद मराठाओं ने पूरे महाराष्ट्र में प्रदर्शन किए थे | उन लोगों ने इस घटना में न्याय के साथ-साथ काफी वक्त से लंबित पड़े आरक्षण के मुद्दे को भी हवा दी थी | मराठाओं द्वारा पढ़ाई और नौकरी में आरक्षण की मांग की गई थी |

इस मामले में अहमदनगर पुलिस ने 350 पन्नों की चार्जशीट फाइल की थी, इन लोगों को आईपीसी की धारा 302 (मर्डर), 376  (रेप) के साथ पोस्को एक्ट के तहत दोषी पाया गया था |

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तीनों आरोपी दलित

पीड़ित लड़की मराठा परिवार से थी और गिरफ़्तार होने वाले तीन युवा दलित थे | इस घटना को लेकर मराठा समाज सड़कों पर आ गया था | पहला विरोध प्रदर्शन औरंगाबाद में हुआ था | उस मोर्चे में मराठों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को ख़त्म करने की मांग की थी |उनका तर्क था कि दलित इस क़ानून का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं | लेकिन बाद में अधिनियम में संशोधन करने की मांग ने ज़ोर पकड़ने लगी थी |