देवउठनी एकादशी के दिन ऐसे करें भगवान श्रीविष्णु की पूजा तो होगा सब मंगल ही मंगल |

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देवउठनी एकादशी 2017

देवउठनी एकादशी के दिन पूजा और व्रत करने से मिलता है  हजार अश्वमेध व सौ राजसूय यज्ञों का फल।

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु चार माह की नींद के बाद जागते हैं |भगवान श्रीहरी को जगाने के लिये इस दिन घण्टा, शंख, मृदंग वाद्यों की मांगलिक ध्वनि के बीच श्लोक पढ़ें जाते हैं। आज के समय में कुछ जगहों में इन सब की बजाय थाली बजा कर भगवान को निंद्रा से उठाया जाता है |हिन्दू धर्म में देवउठनी एकादशी के बाद हीओ सभी मांगलिक कार्य होते हैं क्योंकि सभी देवताओं के साथ भगवान विष्णु चार माह की निंद्रा के बाद जागते हैं |एकादशी दिन  व्रत, पूजन  करने से दुर्भाग्य समाप्त होता है तथा भग्यौदय होता है। दुख-दरिद्रता घर से दूर होती है तथा घर में लक्ष्मी नारायण का वास होता है।

विशेष पूजन विधि: भगवान विष्णु का षोडशोपचार पूजन करें। गौघृत में सिंदूर मिलाकर 11 दीपक करें, 11 केले, 11 खजूर, और 11 गोल फल चढ़ाएं। गूगल धूप करें, कमल का फूल चढ़ाएं व रोली चढ़ाएं। घी-गुड़ का भोग लगाएं तथा तुलसी की माला से इस विशेष मंत्र से 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग किसी ब्राह्मण को दान करें।

पूजन मुहूर्त: दिन 11:42 से दिन 12:26 तक।

पूजन मंत्र: ॐ श्रीमहाविष्णवे देवदेवाय नमः॥

उपाय

दरिद्रता के नाश हेतु पीली सरसों सिर से वारकर श्रीहरि के समीप कर्पूर से जला दें।

पारिवारिक भग्यौदय हेतु केले के पेड़ का पूजन करके उसकी 365 परिक्रमा लगाएं।

दुर्भाग्य से मुक्ति के लिए शालिग्राम जी का शहद से अभिषेक करें।