महिलाओं के पीरियड्स को लेकर यें हैं विभिन्न धर्मों की मान्यताएं | सिख धर्म कहता है सबसे अजीब बात

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different religious beliefs about women's menstrual cycle

महिलाओं के पीरियड्स के बारे में सभी धर्मों में हैं अलग-अलग मान्यताएं 

New Hindi News : महिलाओं के पीरियड्स को लेकर विभिन्न धर्मों में कई अलग-अलग मान्यताएं हैं| कुछ ऐसे बातें जो धर्म के हिसाब से मानी जाती हैं लेकिन सभी को इसके बारे में सही जानकारी नही होती| हिन्दू, मुस्लिम, सिख, बौद्ध व इसाई धर्म पीरियड्स के बारे में अपने भिन्न-भिन्न मत रखते हैं| आगे जानिए पीरियड्स में बारे में सभी धर्मों की मान्यताएं क्या कहती हैं –

महिलाओं के पीरियड्स पर विभिन्न धर्मों की मान्यताएं

हिन्दू धर्म- हन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार पीरियड्स के दौरान महिलाएं अपवित्र होती हैं| इस अवधि में उन्हें किसी प्रकार की पूजा पाठ करने की भी मनाही होती है| किसी प्रकार के यज्ञ-हवन में महिलाएं भाग नही ले सकती| किसी पवित्र तीर्थ में स्नान नही कर सकती| और कई मौकों पर तो उन्हे रसोई में जाकर खाना बनाने की भी अनुमति नही है|

इस्लाम धर्म – इस्लाम धर्म की पवित्र किताब कुरान के अनुसार जब महिलाएं मासिक धर्म में हो हो उन्हें अपवित्र ही माना जाता है| इस समय महिलाओं से दूरी बनाकर रखनी चाहिए| पीरियड्स में महिलाओं को पवित्र कुरान को छूने तक की मनाही है| महिलाएं मस्जिद नही जा सकती|

इसाई धर्म – इसाई धर्म में भी महिलाओं के पीरियड को लेकर दो मत हैं| बाईबल के अनुसार इस दौरान महिलाएं अपवित्र हो जाती हैं| लेकिन उन्हें किसी कार्य को करने से नही रोका जा सकता| महिलाओं से दूर रहने की बात भी बाईबल में नही लिखी गयी|

बौद्ध धर्म- बौद्ध धर्म की मान्यता के अनुसार पीरियड्स के दौरान महिलाएं की कुछ पवित्र शक्तियां खो जाती हैं| मंदिर आदि जाने पर प्रतिबन्ध रहता है |

सिख धर्म- सिख धर्म की मान्यता के अनुसार पीरियड के दौरान महिलाएं अपवित्र नही बल्कि और ज्यादा पवित्र होती हैं| गुरु नानक देव जी के अनुसार मासिक धर्म होने पर महिलाएं एक नये जीवन देने के लिए तैयार होती हैं| और इस ईश्वरीय काम को कभी भी अपवित्र नही माना जा सकता| पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पवित्र मानने वाला सिख धर्म एकलौता धर्म है|