सविधान के अनुसार भारत के हर नागरिक को प्राप्त हैं ये क़ानूनी अधिकार

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every person should know these laws and rights

भारत का सविधान हर नागरिक को कुछ अधिकार देता है जिनका लाभ हर आम-खास व्यक्ति ले सकता है | जानिए कानून के समक्ष अपने अधिकारों के बारे में |

New Hindi News : आज़ादी के बाद भारत में डॉ.भीमराव अम्बेडकर ने इस देश को नया सविधान दिया और इसी सविधान के अनुसार भारत का हर नागरिक आज अपने आपको स्वतंत्र समझता है | देश के प्रति कुछ कर्तव्य  निर्धारित   किये गये   है वहीँ नागरिकों को भी यहाँ बहुत से अधिकार प्राप्त हैं जिनका    देश के हर नागरिक को पता होना चाहिए ताकि समय आने पर किसी का भी शोषण कानून की अज्ञानता की वज़ह से न हो | जानिए अपने क़ानूनी अधिकार………………

ये हैं नागरिकों के कुछ क़ानूनी अधिकार

महिलाओं सम्बन्धी कानून-  भारत के पुलिस कानूनों के अनुसार  केवल महिला पुलिस अधिकारी के पास ही महिलाओं को गिरफ्तार करके सुरक्षित थाने ले जाने का अधिकार होता है | अगर भारत में किसी महिला को पुरुष पुलिस अधिकारी गिरफ्तार करके थाने में लेकर जाता है तो इसको अपराध माना जायेगा और ऐसे पुलिस अधिकारियों पर कानूनी कारवाई की जा सकती है | अगर किसी महिला को रात के 6 बजे से लेकर सुबह के 6 बजे समय के बीच पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा जाता है तो उस महिला को अधिकार है कि वह पुलिस स्टेशन आने से मना कर सकती है | महिला की गिरफ़्तारी केवल दिन के समय की जा सकती है |

लिव-इन रिलेशनशिप – कानून के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप अवैध नहीं है, लेकिन लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुष और महिला को कुछ  बातों का ख्याल ज़रूर रखना होता है | अगर लिव-इन रिलेशनशिप में बच्चे का जन्म होता है तो उसका माता-पिता की प्रॉपर्टी पर पूरा-पूरा अधिकार माना जायेगा|

नाम न छापने का अधिकार- यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को नाम न छापने देने का अधिकार है. अपनी गोपनीयता की रक्षा करने के लिए यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने दर्ज करा सकती है |

वर्ष 1861 में बने पुलिस एक्ट के अनुसार भारत के हर राज्य का पुलिस अधिकारी हमेशा ड्यूटी पर रहेगा | अगर किसी जगह पर आधी रात को भी कोई अपराध या घटना होती है तो पुलिसकर्मी को यह कहने का कोई अधिकार नहीं होता कि वह ड्यूटी पर नहीं हैं क्योंकि पुलिस एक्ट के अनुसार पुलिसकर्मी बिना वर्दी के भी हमेशा ड्यूटी पर रहते हैं |

ट्रैफिक सम्बन्धी कानून 

  • भारत में अगर आप पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने की वजह से दिन में एक बार जुर्माना लगाया जा चूका है तो उस दिन दोबारा जुर्माना नहीं लगाया जा सकता | उदाहरण के लिए अगर आप पर दिन में एक बार हेलमेट ना पहनने का चालान हो गया है तो रात तक आप बिना हेलमेट पहने घूम सकते हैं और ट्रैफिक पुलिस के  अधिकारी आप पर जुर्माना नहीं लगा सकते |
  • किसी भी ट्रैफिक हवलदार को आपको अरेस्ट करने या आपका वाहन जब्त करने का अधिकार नहीं होता | बल्कि वह आपसे पॉल्यूशन अंडर-कंट्रोल पेपर्स(पीयूसी) भी नहीं मांग सकता है क्योंकि यह अधिकार सिर्फ आरटीओ ऑफिशियल्स का होता है | अगर आप किसी तरह का यातायात नियम तोड़ते हैं तब भी उस हवलदार को आपकी गाड़ी से चाबी निकालने का कोई अधिकार नहीं होता है |
  • अगर किसी ने गर्दन के ऊपरी हिस्से यानि कान या किसी अन्य जगह की सर्जरी करवाई हुई है और सिर पर पगड़ी पहनने वाले सिख समुदाय के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य नहीं है |

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  • अगर सड़क पर चलते समय कोई ट्रैफिक हवलदार आपकी गाड़ी को रोककर आपसे पेपर्स दिखाने की मांग करता है तो आप उसे साफ-साफ मना कर सकते हैं | इतना ही नहीं, आप उसके वरिष्ट अधिकारीयों से उसकी शिकायत  भी कर सकते हैं। ट्रैफिक लॉ के अनुसार, एएसआई रैंक या उससे बड़े पद का कोई अधिकारी ही आपसे आपकी गाड़ी के कागज मांगने का अधिकार रखता है |