मोदी ने नही बल्कि इन्होने तैयार किये थे गुजरात में ‘सरदार सरोवर बांध’ समेत कई विकास मॉडल

0
gujrat ex. chief minister chimanbhai patel started sardar sarover dam project

जिस सरदार सरोवर बांध को मोदी चुनावी मुद्दा बनाये हुए है, इसी बांध को पूरा करवाने के लिए इसी नेता ने भरपूर कोशिश की थी | लेकिन उनकी मौत के बाद अधर में अटक गया था ये प्रोजेक्ट

New Hindi News : देश की राजनीति में  इमरजेंसी के दौर की थोड़ी सी भी समझ रखने वालों को गुजरात के तेज़-तरार मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल के बारे में आवश्य ही जानते होंगे | 1975 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गाँधी ने देश को इमरजेंसी के जिस भयावह दरिया में   धकेलर जिस तरह लोकतंत्र का गला     घोटने की    कोशिश की थी उसके तार कहीं न कहीं  गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल से जुड़े हुए थे | दो बार गुजरात के मुख्यमंत्री बनने वाले चिमनभाई ने ही गुजरात में सरदार सरोवर बांध की नीव डाली थी | लेकिन 1994 में अचानक उनकी मौत के बाद यह प्रोजेक्ट बंद हो गया |

चिमनभाई, पटेल समुदाय से सम्बंध रखते थे |  पटेलों का गुजरात की राजनीति में अहम स्थान है ये सभी को पता है | उस दौर में जब इंदिरा गाँधी की तूती बोलती थी|  उस समय इंदिरा से कोई ऊँची आवाज़ में बात करने की हिम्मत नही करता था | चमनभाई इंदिरा से सीधे-सीधे अपने अंदाज़ में बात करते थे | ये इमरजेंसी से पहले की बात है जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे |

इतिहास से सीख लें भाजपा

आज गुजरात में चुनावी माहौल है | बीजेपी के बड़े नेता वोट के लिए गुजरात के विकास के नाम पर लोगों को जोड़ने का प्रयास तो कर रहे हैं , लेकिन जीएसटी के कारण कुछ चीज़ों में महंगाई के कारण गुजरात की जनता की नाराज़गी का भय भी उन्हें सता रहा है | नरेंद्र मोदी, अमित शाह आदि दिग्गज इतिहास को भली भांति जानते हैं जब एक इंजीनियरिंग कॉलेज की मेस का खाना 30 प्रतिशत महंगा होने के कारण चिमनभाई चिमन चोर हो गये थे |

ये वो दौर था जब 1971 के युद्ध  के कारण महंगाई की मार झेल रही अर्थव्यवस्था ने देश की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ राजनितिक स्थिति भी बिगाड़ कर रख दी थी | इंजीनियरिंग कॉलेज की मेस में खाने के दाम 30 प्रतिशत बढ़ा दिए गए | इस बढ़े हुए दाम को ज्यादातर छात्र बर्दाश्त नहीं कर सके | छात्रों का आंदोलन चला और गुजरात की जनता के लिए चिमनभाई चिमनचोर हो गए | इसके बाद पुरे गुजरात में  हिंसक आन्दोलन हुए  और 150 से ज्यादा लोग मारे गए |  60 शहरों में कर्फ्यू  लगा | चिमन चोर कहलाए जा रहे चिमन भाई को सत्ता से हाथ धोना पड़ा |  गुजरात भर में चल रहे इस आंदोलन को देखकर ही जेपी यानी जय प्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने का निर्णय लेना पड़ा |

इन सब घटनाओं के बाद इंदिरा गाँधी ने चिमनभाई से इस्तीफा ले लिया | और इंदिरा को भी सत्ता छोडनी पड़ी | और तीन साल बाद केंद्र में इंदिरा की वापसी हो पायी |  चिमनभाई 16 साल बाद वापस आ पाए |

1990 में बने दोबारा मुख्मंत्री

अस्सी के पूरे दशक में चिमनभाई पटेल सत्ता से महरूम रहे | 4 मार्च 1990 को चिमनभाई जनता दल और भारतीय जनता पार्टी की साझा सरकार में फिर से गुजरात के मुख्यमंत्री बने |  भारतीय राजनीती में ये वही दौर था जब वीपी सिंह के मंडल और बीजेपी के मंदिर वाले कमंडल की राजनीति चल रही थी | मंडल-कमंडल की राजनीती | बाद में चिमनभाई ने कांग्रेस के 34 बागी विधायकों को मिलाकर अपनी सरकार बनाई थी | चिमनभाई पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने गौ हत्या बंद की| उन्होंने  हिंदू और जैन त्योहारों पर मांस की बिक्री बंद की | रिफाइनरी और पावर प्लांट में प्राइवेट कंपनियों के साथ साझेदारी शुरू कर गुजरात के विकास की नींव रखने का श्रेय है |