ईद मिलादुन्नबी पर मध्य प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लगाये भड़काऊ पोस्टर !

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jalebi chowk khandwa madhya pradesh eid miladunnabi poster

भारतीय राजनीती और समाज में जब भी मुस्लिम धर्म की बात होती है तो कुछ खास किस्म में डिज़ाइनर पत्रकार और तथाकथित सेकुलर राजनीती के पुरोधा मुस्लिमों को दबा कुचला और डरा हुआ सम्प्रदाय दिखाने की कोशिश करते हैं | दरअसल वो ऐसा अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए करते है | ठीक है ये तो हुई राजनेताओं की बात लेकिन अब देखते हैं असल में कितना शोषित है मुस्लिम समाज |

मार काट वाली भाषा क्या किसी शोषित वर्ग की हो सकती है ?

आपको बता दें की बीते दिनों मुस्लिम समाज ने ईद मिलादुन्नबी का त्यौहार बड़े ही धूम धाम से मनाया | 125 करोड़ की जनसँख्या वाले देश में 20%  आबादी वाले तथाकथित अल्पसंख्यक समाज अपने हर छोटे बड़े त्यौहार को बिना किसी रोक टोक के मनाता है |त्यौहार किसी भी धर्म के हों शांति और भाईचारे के होते हैं | लेकिन मध्यप्रदेश के खंडवा में त्यौहार को कुछ लोगों ने उपद्रव फ़ैलाने का जरिया बना दिया |मध्यप्रदेश के खंडवा के जलेबी चौक पर कुछ ऐसे पोस्टर लगाए गये जो किसी भी सूरत में किसी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किये जा सकते |पोस्टर पर धार्मिक भावना आहात करने वाले जुमले लिखे थे मार काट देने वाले बर्बर शब्द छपे थे |

” चीर के बहा दो लहू दुश्मन के सिने का, यही मजा है मुसलमान होने का।  बुजदिल हम नहीं जो पीछे से वार करते हैं, हम तो वो मुसलमान हैं जो शेर का भी जगाकर शिकार करते हैं। हमारे अज्म को हमारे गद्दार जान जाएंगे, अगर इतिहास पढ़ लेंगे तो पहचान जाएंगे, ये हिन्दुस्तान मेरे ख्वाजा का था और रहेगा गलतफहमी में मत रहना की राम राज्य लाएंगे।”

jalebi chowk khandwa madhya pradesh eid miladunnabi poster

चीर फाड़ देने वाली और गैर मुस्लिमों को मार भागने वाली और इश्लामिक राज लाने वाली ये पंक्तियाँ दर्शाती हैं की उक्त विचारधारा वाले लोग भारतीय लोकतंत्र में विश्वास नहीं  रखते हैं | इस सोच को हम बर्बर तालिबानी और ISIS से भी घातक कह सकते हैं | इस से भी बड़ी बार और सवाल ये है के इस मध्यकालीन सोच के साथ भारत का मुस्लिम समाज आखिर जाना कहाँ  चाहता है |