जिस ICS को पास करने के लिए ब्रिटिश युवा भी 4 साल कड़ी मेहनत करते थे, नेताजी ने 7 महीनों में ऐसे किया था टॉप

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netaji subhash chander bose passed ics as topper but resigned

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजी में होने वाली ICS परीक्षा को 7 महीनों में टॉप करके भी इन कारणों ठुकरा दी थी इतनी बड़ी नौकरी | अंग्रेजों ने दिए थे ये ऑफ़र !

New Hindi News : नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का नाम भारत के वीर क्रांतिकारियों में शीर्ष पर आता है | देशभक्ति व अंग्रेजों के प्रति नफरत उनमे कूट-कूटकर भरी हुई थी | तभी तो इंडियन सिविल सर्विस (ICS) की परीक्षा में टॉपर आने के बावजूद भी उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी करने की बजाय भारत माता को विदेशी ताकतों के बंधन से मुक्त करवाने के लिए अपनी जिंदगी के तमाम एशो-आराम त्याग दिए|अंग्रेजों नेताजी को ऑफर  दिया था  कि यह जो सत्ता चल रही है इसमें हमारे साथ शामिल हो जाओ, तुम भी लूटो, हम भी लूटें | लेकिन उन्होंने इस ऑफर को ठुकरा दिया था |

पिता की जिद्द के कारण दी थी परीक्षा

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन की विडंबना क्या थी उनको आईसीएस (ICS) की नौकरी में सेलेक्ट होना पड़ा| उनके पिताजी की इच्छा की पूर्ति के लिए, क्योकि पिता जी चाहते थे कि मेरा बेटा कलेक्टर बने और बेटे को बार-बार वह ताना मारते थे कि तू बन नहीं सकता| तू होशियार कम है, तेरे पास तैयारी नहीं है, इसलिए बहाना बनाता रहता है| तो बेटे ने अपनी पात्रता सिद्ध करने के लिए परीक्षा दी और उस जमाने में आई सी एस की परीक्षा देने के लिए चार-चार साल लोग पढ़ाई करते हैं|

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिर्फ 7 महीने पढ़ाई की थी और उतनी पढ़ाई में उन्होंने आई सी एस के टॉपर की लिस्ट में चौथी पोजीशन पाई थी| उस जमाने में आईसीएस टॉप करना किसी भारतीय लड़के के लिए संभव ही नहीं था, क्योंकि इस परीक्षा में अंग्रेज टॉप किया करते थे| वह पहले भारतीय व्यक्ति थे जिनको टॉपर लिस्ट में चौथा स्थान मिला था |

उन्होंने नौकरी को रिजाइन कर दिया| जब उन्होंने इस्तीफा दिया था ब्रिटिश सिस्टम में हड़कंप मच गया था क्योंकि भारत के कई लड़के पहले आईसीएस बन चुके थे किसी में हिम्मत नहीं हुई थी इस्तीफा देने की| सुभाष चद्र बोस जी ने इस्तीफा दिया और इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि मै इस तंत्र में शामिल इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि मेरी भारत माता की लूट के लिए यह तंत्र बना है और मैं मेरे देश को लुटू यह मेरा दिल मुझे गवाही नहीं देता| इसलिए मै छोड़ रहा हूं| नेताजी ने रिजाइन किया, बोरिया बिस्तर समेट के भारत आ गए, पिताजी के दिल पर वज्रपात हो गया कि बेटे ने आईसीएस को लात मार दी| तो बेटे ने पिता को समझाया कि मै हर बार इस नौकरी को तो लात ही मारूंगा| जब तक यह व्यवस्था भारत को लूटने की व्यवस्था है| मैं इसमें शामिल नहीं हो सकता|

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आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना

इसके बाद उन्होंने भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष शुरू कर दिया|भारत के लोगों के लिए वो नेताजी बन गये| उनकी बढती लोकप्रियता देखकर अंग्रेज़ भी घबरा गये थे| उन्हें नजरबंद किया गया | बाद में अंग्रेजों को धोखा देकर वो अफगानिस्तान होते हुए जर्मनी व जापान तक गये और आज़ाद हिन्द फ़ौज की स्थापना करके भारत माता की आज़ादी की नीव रखी | देश के ऐसे सच्चे सपूत को New Hindi News दिल से नमन करता है |