85 साल से चली आ रही हज सब्सिडी क्यों मोदी सरकार ने 2022 से पहले ही खत्म कर दी ? जानिए पूरा सच

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New Hindi News : सुप्रीम कोर्ट ने हज सब्सिडी को 2022 तक खत्म करने के निर्देश दिए थे केंद्र सरकार में मुसलमानों को हज के लिए दी जाने वाली सब्सिडी 2018 से ही बंद करने का फैसला कर लिया है| इस मामले में केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने बताया इस साल हज करने वाले मुसलमानों को सरकार की तरफ से कोई छुट नही दी जाएगी| जिसे हज करना है वो अपने पैसों से जाये| बताया जा रहा है कि हज सब्सिडी पर सरकार हर साल 700 करोड़ रूपये खर्च करती थी जो टैक्स पेयर पर एक बहुत बड़ा बोझ था| जानिए हज सब्सिडी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य…….

हज सब्सिडी का सच

1. हज सब्सिडी की शुरुआत वर्ष 1932 में हुई थी| उस समय देश के मुसलमानों ने ब्रिटिश सरकार के समक्ष हज यात्रा पर कुछ रियायत देने की मांग रखी थी| कोलकाता और मुंबई से हज यात्री समुद्री जहाज़ में सफ़र करते थे| ब्रिटिश कंपनी मोगुल शिप्स के जहाज पर हज यात्रा होती थी|  इसके बाद हज के लिए 1954 में हवाई सफ़र भी शुरू हुआ|

2.बहुत से मुस्लिम स्कॉलर भी इसका शुरू से ही विरोध करते आ रहे हैं| कुछ मुस्लिमों का कहना है कि हज के लिए सब्सिडी लेना मुस्लिम धर्म के खिलाफ है| लेकिन इस विषय पर हमेशा से ही राजनीती होती रही | इसे मुस्लिम वोट बैंक से जोड़कर देखा जाता रहा है|

3. कुछ मुस्लिम सरकार पर ये भी आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार का हज सब्सिडी देना केवल एक ढकोसला है| हज यात्रा के दौरान एयर इंडिया के किराये में वृद्धि हो जाती है और इस प्रकार सब्सिडी का कोई मतलब नही रह जाता| इस समय मुसलमानों से सामान्य से भी अधिक किराया वसूला जाता है|

4. जानकारी के मुताबिक 2008 तक सरकार हज के लिए लगभग 70 हज़ार रूपये की सब्सिडी देती थी जिसे बाद में कम कर दिया गया| इसके अलावा समुद्र के रास्ते जाने वालों को 3 हज़ार की सब्सिडी सरकार की तरफ से मिलती थी|

5. वर्ष 2012 में उच्चतम न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि 2022 तक धीरे-धीरे हज सब्सिडी खत्म करें| लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने यह काम 2018 में ही कर दिया| सरकार ने इस पैसे को मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा के पर खर्च करने का फैसला लिया है|

6.कुछ मुस्लिम नेता (ओवैशी) आरोप लगा रहे हैं कि केवल मुस्लिमों की सब्सिडी क्यों खत्म की गयी| जबकि हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और इलाहाबाद में लगने वाले चार कुंभ मेले के लिए भी राज्य और केंद्र सरकारें पर्याप्त पैसा खर्च करती हैं| कुछ मुस्लिम योगी आदित्यनाथ पर भी सवाल उठा रहे है जिन्होंने कुछ समय पहले ही कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए   सब्सिडी 50 हज़ार से बढाकर 1 लाख कर दी|