26 जनवरी 1950 को राजेन्द्र बाबू ने कहा था-“आज से प्रजा राजा हो गई”, पर क्या वास्तव में राजा हो गयी प्रजा ?

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rajendra prasad first indian president said on 26 january 1950 'aaj se parja raja ho gayi'

26 जनवरी 1950 को संविधान देश को समर्पित करते हुए राजेंद्र बाबू ने कहा था- ‘आज से प्रजा राजा हो गई’ 

New Hindi News : आज से 68 वर्ष पूर्व तत्कालीन राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने देश के सविधान को देश को समर्पित किया था और उम्मीद जताई थी कि सदियों से गुलामी झेल रही भारत की जनता को अब अपने सविधान के अनुसार जीने का अवसर मिला है| सदियों से शोषित रहे भारतीय समाज को अब खुली हवा में साँस लेने, गुलामी की जंजीरों को काटने और अपना विकास करने का अवसर मिलेगा| अपना वोट डालकर देशभक्त सरकार चुनने का अधिकार मिलेगा|

भारत का गणतंत्र दिवस

लेकिन उस समय शायद किसी ने सोचा भी नही होगा कि आज़ादी के 70 सालों के बाद भी जनता राजा की बजाय भिखारी ही बनी रहेगी और गुंडे, चोर, लुटेरे उन पर शासन करेंगे| आज भी किसान गरीबी की वज़ह से आत्महत्या कर रहे हैं, देश की युवा शक्ति बेरोज़गारी के बोझ तले दबकर अपनी जवानी बर्बाद कर रही है| तो क्या वास्तव में प्रजा राजा हो गयी? राजा तो हो ही गयी.. पर केवल मतदान के समय ही| सवाल उठता है कि   क्या इसी व्यवस्था के लिए भारत देश के वीर शहीदों ने अपना बलिदान दिया था|

जनता को राजा बनाने का सपना देखने वाले हमारे देशभक्तों के सपने आज टूटते नजर आ रहे हैं| क्यों राजनीती के लिए हमारी रगों में जातिवाद का जहर घोला जा रहा है ? कभी आरक्षण के नाम पर देश की प्रतिभा को नष्ट करके हमारी जड़ों को खोखला किया जा रहा है| प्रजा तो राजा बनी नही बल्कि राजा बनने के लिए प्रजा को इस्तेमाल किया जा रहा है| सभी राजनितिक दल अपनी राजनितिक रोटियां सकने के लिए प्रजा को मोहरा बनाकर बजी खेल रहे हैं| इन सब कार्यों के बीच नेताओं को केवल वोट के समय प्रजा दिखाई देती है| इस कड़ी में कोई भी पोलटिकल पार्टी पीछे नही है| ऐसे में देश की जनता को सोचना होगा कहीं देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद का ये सपना (प्रजा को राजा बनाने का) सपना ही न रह जाये| और अंत में मिर्ज़ा ग़ालिब की कुछ पंक्तियाँ जो आज की सियासत पर बिलकुल फिट बैठती हैं – “इस दौर ए सियासत का बस इतना सा फसाना है, बस्ती भी जलानी है और मातम भी मनाना है”