काल्पनिक घटना नही है रामायण, जानिए श्रीराम के अस्तित्व को सिद्ध करने वाले ये तथ्य

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ramayan ke sabut aur sachchai in hindi

Ramayan ke sabut aur sachchai in hindi

भगवान राम के साथ हिन्दू धर्म की आस्था जुडी हुई है | लेकिन कई लोग भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े करने लगते हैं | जानिए श्रीराम के अस्तित्व से जुड़े ये सबूत

New Hindi News : भगवान श्रीराम का अस्तित्व है या नही इस बात पर लोग कई तरह के तर्क देते है | कुछ लोग रामायण को सत्य मानते हैं लेकिन कुछ लोग इसे केवल एक काल्पनिक ग्रन्थ कहते हैं | सबसे बड़ा सवाल अगर रामायण काल्पनिक है तो भगवान श्रीराम के अलावा हनुमान जी, भगवान शिव, लंकापति रावण तक सब पात्र झूठे हैं | लेकिन ऐसा संभव नही लगता | आज हम आपको कुछ ऐसे तथ्यों से रूबरू करवाने जा रहे हैं जो ये सिद्ध करने के लिए काफी हैं कि रामायण एक सच्ची घटना है |

द्रोणागिरी पर्वत 

युद्ध में जब लक्ष्मण मूर्क्षित हुए थे तब हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत गए थे , जहाँ उन्हें कुछ न समझ आने पर पूरा द्रोणागिरि  पर्वत ही उठा लाये थे और बाद में उसे वापस उस स्थान पर रख आये. रामायण में इस घटना का वर्णन है और वर्तमान में हम आज भी द्रोणागिरी पर्वत के दर्शन कर सकते हैं क्यूंकि ये आज भी अपनी जगह पर अटल है ! आज भी उस पर्वत पर वो निशान मौजूद हैं जहाँ से हनुमान जी ने उसे तोड़ा था!

रामायण काल के सबूत

राम सेतु 

रामायण में राम सेतु का वर्णन साफ तौर पर किया गया है जिसका निर्माण वानर सेना ने श्री राम के श्रीलंका भ्रमण के समय किया था| ये मानव निर्मित सेतु है| आप आज भी इस सेतु को देख सकते हैं जिसके निर्माण में ना डूबने वाले पत्थरो का प्रयोग किया गया था ये पत्थर आज भी पानी में डूबने के बजाए तैरते हैं |

अशोक वाटिका 

सीता हरण के पश्चात रावण ने उन्हें अशोक वाटिका में रखा था क्यूंकि सीता माता ने रावण के महल में रहने से मना कर दिया था ये अशोक वाटिका आज भी मौजूद है |

 जानकी मंदिर

नेपाल के जनकपुर शहर में जानकी मंदिर है|  आपको पता हो कि  सीता माता के पिता का नाम जनक था जिनके नाम पर शहर का नाम जनकपुर पड़ा और सीता माता की माँ का नाम जानकी था जिनके नाम पर जानकी मंदिर का निर्माण किया गया जहाँ आज भी लाखों की संख्या में लोग आते हैं|

हनुमान जी के पैरों के निशान 

हनुमान जी ने लंका जाने के लिए अपना विशाल रूप घारण किया था | उस समय लंका में समुद्र तट पर उनके पैरों के निशान बन गये थे जो आज भी मौजूद हैं |

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पानी में तैरते पत्थर 

पिछले दिनों सुनामी के कारण रामसेतु वाली जगह पर भारत व श्रीलंका के बीच कुछ ऐसे पत्थर सामने आये जो पानी में तैर रहे थे |जबकि अन्य पत्थर पानी में डूब जाते हैं |

रावण का महल 

पुरातत्व विभाग ने श्रीलंका में एक प्राचीन महल को खोजा था | यह लगभग उतना ही पुराना है जितना कि रामायण में जिक्र है | इसमें   कई गुप्त रास्ते हैं जो शहर के मुख्य केंद्रों तक जाते हैं |अनुमान लगाया जा रहा है कि ये महल रावण का वो महल है जिसकी चर्चा रामायण में की गयी है |

श्रीलंका में हिमालय की जड़ी बूटियाँ 

श्रीलंका में हिमालय की जड़ी बूटियो का मिलना इस बात का पर्याप्त सबूत है कि लक्षमण को संजीवनी देने की घटना पूर्ण रूप से सत्य है|क्यूंकि ये जड़ी बूटियो के पौधो उसी स्थान पर मिले हैं जहाँ पर लक्षमण को संजीवनी दी गयी थी |

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धरती का काला रंग 

लंका दहन की घटना सर्वविदित है| रामायण के अनुसार हनुमान जी ने पूरी लंका में आग लगा दी थी जिसके प्रमाण आज भी मिलते हैं| जलने के बाद आज भी लंका की धरती काली हो गयी है| हालाँकि श्रीलंका की धरती का रंग भूरा है पर जिस जगह पर लंका दहन की घटना घटित होने का वर्णन है वहाँ की ज़मीन आश्चर्यजनक रूप से आज भी काली है|

गर्म पानी के कूप 

रावण ने कोणेश्वरम मंदिर के पास गर्म पानी के कुएं बनवाए थे, जो आज भी वहां मौजूद हैं |

विशालकाय हाथी 

रामायण के एक अध्याय में विशालकाय ट्स्क हाथी का वर्णन है जिसे हनुमान जी ने मूर्छित किया था| हाल ही में श्रीलंका के पुरातत्व विभाग को ऐसे हाथियों के अवशेष मिले हैं जिनका आकर सामान्य हाथियों से कई गुना ज़्यादा है |

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रामलिंगम 

रावण को मारने के बाद भगवान राम को पश्चाताप करना था क्योंकि उनके हाथ से एक ब्राहमण का कत्ल हुआ था| इसके लिए उन्होंने शिव की आराधना की | भगवान शिव ने उन्हें चार शिवलिंग बनाने के लिए कहा| एक शिवलिंग सीता जी ने बनाया जो रेत का था| दो शिवलिंग हनुमान जी कैलाश से लेकर आए थे और एक शिवलिंग भगवान राम ने अपने हाथ से बनाया था, जो आज भी उस मंदिर में हैं और इसलिए ही इस जगह को रामलिंगम कहते हैं |

पुरातत्व विभाग की मुहर 

भगवान राम के होने की बात खुद पुरातत्व विभाग भी मानता है| पुरातत्व विभाग के अनुसार 1,750,000 साल पहले श्रीलंका में ही सबसे पहले इंसानों के घर होने की बात कही गई है और राम सेतु भी उसी काल का है |

कोणेश्वरम मंदिर

रावण भगवान शिव की अराधना करता था और उसने भगवान शिव के लिए इस मंदिर की भी स्थापना करवाई| यह दुनिया का इकलौता मंदिर है जहां भगवान से ज़्यादा उनके भक्त रावण की आकृति बनी हुई है| इस मंदिर में बनी एक आकृति में रावण के दस सिरों को दिखाया गया है| कहा जाता है कि रावण के दस सिर थे और उसके दस सिर पर रखे दस मुकुट उसके दस जगहों के अधिपत्य को दर्शाता है|

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