नुक्सान भी कर सकते हैं आयुर्वेदिक नुक्से | जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ ?

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आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के भी होते हैं साईड-इफ़ेक्ट | इस्तेमाल से पहले बरतें ये सावधानियां

Side Effects of Ayurvedic Medicines:

अक्सर हम में से अधिकतर लोग सोचते हैं कि किसी भी सामान्य रोग में यदि हम अपने घर में मौजूद जड़ी-बूटियों या रसोईघर में रखे मसालों का प्रयोग करके ठीक हो सकते हैं | यह सच है कि इस प्रकार के घरेलू नुक्से हमे छोटी-छोटी बिमारियों से बिना डॉक्टर की मदद लिए छुटकारा दिला देते हैं |एक प्रसिद्ध कहावत है कि अति सर्वत्र वर्ज्यते | अर्थात किसी भी का अत्यधिक प्रयोग हमेशा नुकसान देता है | और यह बात शत-प्रतिशत  सच है अति से तो अमृत भी जहर बन जाता है |

यही बात आयुर्वेदिक निक्सन के बारे में भी सत्य है | आइये जानते है कि किन – किन परिस्थितियों में अमृत के सामान समझे जनि वाली ये औषधियाँ शरीर के लिए जहर बन जाती हैं….

ज्ञात हो सही मात्रा :

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हमारे देश में सदियों से फल-सब्जियों में आयुर्वेदिक उपचार ढूंढा जाता रहा है | ये बहुत अच्छी बात है | लेकिन आजकल के डॉक्टर मानते है कि किसी विशेष बीमारी के इलाज में यदि हम इसका प्रयोग करें तो इसकी सही मात्रा की जानकारी होना आवश्यक होता है |

अधिक जामुन के नुकसान :

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जामुन का फल हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है | मधुमेह के रोगी इसका प्रयोग करके अपने शुगर के लेवल को कम करते हैं | साथ ही साथ इसके बीजों के चूर्ण को भी इस बीमारी में खाया जाता है |परन्तु अगर मात्रा की बात करें तो इसके बीजों के चूर्ण की एक दिन में 20 ग्राम की मात्रा काफी होती है | इससे अधिक मात्रा में सेवन से यह व्यक्ति का हाज़मा ख़राब कर सकती है |

दालचीनी :

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दालचीनी हमारे रसोईघर में मौज़ुद एक ऐसी औषधी है जो भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ ही कई रोगों में कारगर है | अगर हम सीधे इसका सेवन करते है तो इसका तीखापन हमारी जीभ व मुख को हानि पहुंचाता है | इसके तीखे स्वाद के कारण सीधे इसका सेवन करने से जीभ पर छाले पद जाते है | इसके साथ ही इसकी अधिक मात्रा का सेवन हमारे पेट में मौजूद आंतड़ियों को हानि पहुँचाता है |

तुलसी :

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आयुर्वेद में तुलसी का सेवल बहुत सी बिमारियों के इलाज के लिए किया जाता है | परन्तु इसके सेवन से पहले यह जान लेना आवश्यक है कि तुलसी में पारा की मात्रा होती है | इसलिए यदि हम तुलसी का सेवन करें तो कभी भी इसे दांतों से न चबाएं | यह दांतों के लिए हानिकारक होता है |

सौंठ :

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सर्दी-खांसी व कफ के दोषों के निवारण के लिए अक्सर हम सर्दियों में सौंठ का प्रयोग काढ़े व चाय में करते है | कफ के अलावा बहुत से वात रोगों में भी इसको प्रयोग किया जाता है | परन्तु इसका लगातार व अधिक मात्रा  में प्रयोग हमारे शरीर में पित दोष को बढ़ा देता है | जिसके कारण शरीर में त्वचा के ऊपर लाल – लाल दाने निकल आते है | गर्भवती स्त्रियों को तो इसका प्रयोग करना ही नही चाहिए गर्भ गिर सकता है |

शहद :

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अधिक मात्रा में शहद का सेवन भी हानिकारक हो सकता है | यह भी प्रकृति में थोडा गर्म होता है | इसलिए शहद के प्रयोग में भी सावधानी बरतनी चाहिए |