भारत में इस पेड़ को मिली है VIP सुरक्षा ! 24 घंटे पत्ते-पत्ते पर नजर रखते हैं जवान |

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इस पेड़ की सुरक्षा में सरकार ने हर समय चार सिपाहियों की ड्यूटी लगाई है 

New Hindi News : अभी तक आपने वीआइपी नेताओं व अधिकारीयों के बारे में सुना होगा| वीआइपी जानवरों के बारे में भी सुना होगा | कई बार कुछ खास लोगों के कुत्ते भी वीआइपी हो   जाते हैं|  लेकिन क्या आपने कभी वीआइपी पेड़ों के बारे में सुना है ? नहीं सुना होगा, तो   आज हम आपको एक ऐसे ही पेड़ के बारे में बताने जा रहे हैं जो हमेशा वीआइपी सिक्योरिटी में रहता है| और सरकार ने खास इस पेड़ की सुरक्षा के लिए 24 घंटे 4 सुरक्षा गार्डों की ड्यूटी लगाई है |

वीआइपी सुरक्षा वाले पेड़ की पूरी कहानी

यह पेड़ मध्यप्रदेश में है और यह किसी नेता या अधिकारी के बंगले में नही बल्कि एक पहाड़ी पर लगा हुआ है| सुरक्षा गार्डों के अलावा इस पेड़ को पानी देने के लिए प्रतिदिन फायर ब्रिगेड की गाड़ी आती है| सांची और सलामतपुर के बीच हाईवे किनारे एक छोटी पहाड़ी पर सुरक्षा जालियों के बीच एक पेढ़ लहरा रहा है| सामान्य तौर पर लोग इसे पीपल का पेड़ मानते हैं, लेकन इसकी कड़ी सुरक्षा को देख उनके दिमाग में यह प्रश्र जरूर उठता है कि इस पेड़ की इतनी सुरक्षा क्यों ? लगभग 15 फीट ऊंचाई तक जालियों से घिरा और आस-पास पुलिस के जवान| ऐसा क्या खास है इस पेड़ मेें ? हाईवे से गुजरने वाले जिन लोगों को यह नहीं मालूम कि इस पेढ़ की खासियत क्या है, क्यों यह इतना महत्वपूर्ण है? उन्हे आश्चर्य जरूर होता है|

दरअसल, यह पेड़ 21 सितंबर 2012 को श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे एवं मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दर्जनों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मध्यप्रदेश के विश्व पर्यटन स्थल सांची के पास बौद्ध यूनिवर्सिटी की प्रस्तावित पहाड़ी पर रोपा था| जानकारी के अनुसार जिस पेड़ के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी उसी की एक टहनी को श्रीलंका में स्थापित किया गया था| जिसके बाद श्रीलंका से उस टाहनी को लाकर मध्यप्रदेश में लगा दिया गया था| जिसके बाद से ही इस पेड़ को बोद्ध वृक्ष के नाम से जाना जाता है|

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एक रिपोर्ट के अनुसार इस पेड़ की सुरक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार हर महीने लगभग एक लाख रुपए खर्च कर रही है| फिलहाल इस पेड़ पर सरकार 65 लाख रुपए खर्च कर चुकी है| इस पेड़ की सुरक्षा के लिए 4 जवान दिन-रात वहां तैनात रहते हैं| साथ ही वहां नगर परिषद सांची से पानी का टैंकर भिजवाया जाता है|