डिप्रेशन,चिंता व मानसिक तनाव से पलभर में ही मुक्ति दिलाएंगे ये योगासन

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yoga for tension,mental health and depression

हर मनुष्य के लिए तनाव आज उसके जीवन का हिस्सा बन चुका है| ऐसे में आप कैसे योगा की मदद से अपनी मानसिक हालत में सुधार करके तनावमुक्त हो सकते हैं ?

New Hindi News : जीवन में सुख-दुःख सभी को झेलने पड़ते हैं| ऐसा किसी का भी जीवन नही है चाहे वो गरीब हो या अमीर जिसके जीवन में केवल सुख ही आते हों या केवल दुःख ही आते हों| इसलिए जीवन के दोनों ही अनुभवों में समझदार व्यक्ति सामंजस्य स्थापित कर लेते हैं| डिप्रेशन,चिंता तनाव पर काबू पाने के लिए हमारे पूर्वजों ने हमे योग   जैसी अनमोल विद्या प्रदान की है|आइये जानते हैं कैसे योग के द्वारा हम किसी भी प्रकार के तनाव व चिंता से आसानी से मुक्ति पा सकते हैं |

इन लक्षणों से पहचानें तनाव को

  1. असामान्य रूप से घबराहट या बेचैनी महसूस करना तथा किसी प्रकार का भय प्रतीत होना |
  2. किसी भी घटना से सम्बंधित विचारों का बार-बार मान में आना|
  3. रात्रि के समय डरकर नींद खुलना|
  4. अनिद्रा से परेशान रहना|
  5. दिल की धड़कन असामन्य रहना|
  6. असामान्य रूप से हाथ पेरो में पसीना आना|
  7. बार-बार पेशाब आना|

इस प्रकार के सभी लक्षण यदि आपमें हैं तो आपको समझ जाना चाहिए कि आप मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं| यदि यही स्थिति लम्बे समय तक चलती रही तो आप में डिप्रेशन की गंभीर बीमारी अपना भयंकर रूप दिखा सकती है| समय रहते आपको योग-प्राणायाम के द्वारा इसे कण्ट्रोल कर लेना आवश्यक है|हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार किसी भी बीमारी का सबसे कारगर व निश्चित इलाज योग है|

अनुलोम विलोम प्राणायाम

इस प्राणायाम को ‘नाड़ी शोधक प्राणायाम’ भी कहते है| अनुलोम-विलोम को रोज करने से शरीर की सभी नाड़ियों स्वस्थ व निरोग रहती है|इस आसान को करने से ऑक्सिजन की पर्याप्त मात्रा मस्तिष्क में पहुँचती है। जिससे मन शांत और तनाव दूर होता है। इस प्राणायाम को करने से साइनासाइटिस का कष्ट तथा मानसिक तनाव का स्तर कम होता है|

विधि -: अपनी सुविधानुसार पद्मासन, सिद्धासन, स्वस्तिकासन अथवा सुखासन में बैठ जाएं| फिर अपने दाहिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र से सांस अंदर की ओर भरे और फिर बायीं नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें| उसके बाद दाहिनी नासिका से अंगूठे को हटा दें और सांस को बाहर निकालें| अब दायीं नासिका से ही सांस अंदर की ओर भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को 8 की गिनती में बाहर निकालें| इस क्रिया को पहले 3 मिनट तक और फिर धीरे-धीरे इसका अभ्यास बढ़ाते हुए 10 मिनट तक करें| 10 मिनट से अधिक समय तक इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए| इस प्रणायाम को सुबह-सुबह खुली हवा में बैठकर करें|

कपालभाति प्राणायाम

यह आसान करने से शरीर दुरुस्त, मन प्रसन्न और स्मरण शक्ति में बढ़ोतरी होती है। इसके नियमित अभ्यास से आँखों के रोगो से मुक्ति मिलती है और आँखों की रौशनी बढ़ती है। यह शरीर को चर्बी, कब्ज आदि समास्यो से भी राहत दिलाता है| यह आसन खड़े होकर या बैठकर भी किया जा सकता है। इस आसन में साँस लेने और छोड़ने की गति जितनी तेज होती है यह उतना ही लाभप्रद होता है|

विधि -: एक समतल, स्वच्छ और हवादार जगह पर कपड़ा बिछाकर बैठ जाएं|आप पदमासन, वज्रासन अथवा सिद्धासन की मुद्रा में बैठ सकते हैं। या सामान्य सरल मुद्रा में भी बैठ सकते हैं|इसके बाद अपने पेट को ढीला छोड़ दें|नाक से सांस को बाहर छोड़ने की क्रिया करें और सांस बाहर निकालते हुए पेट को अंदर की ओर खींचें|श्वास को अंदर खींचने की आवश्यकता नहीं है। यह क्रिया स्वयं हो जाती है|आसानी से लगातार नाक से श्वास बाहर छोड़ने और पेट को अंदर खींचने की क्रिया को करते रहें|आरंभ में 10 बार और धीरे धीरे बढ़ाते हुए एक बार में 60 बार तक यह क्रिया करें|आवश्यकतानुसर बीच बीच में आराम ले सकते हैं|

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इसके अलावा पद्मासन में बैठकर मैडिटेशन करने से भी डिप्रेशन, चिंता और तनाव से मुक्ति मिलती है| अधिक मुश्किल योग का अभ्यास किसी योग्य गुरु के सानिध्य में ही शुरू करें |